कुड़ुख भाषा की लिपि ‘तोलोंग सिकि’ को वैश्विक पहचान — यूनिकोड में शामिल हुआ ‘Kelly Tolong’ फॉन्ट

भारतीय आदिवासी भाषाओं के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। कुड़ुख (कुंडुख) भाषा की लिपि तोलोंग सिकि अब विश्व स्तर पर डिजिटल माध्यमों में लिखी और पढ़ी जा सकेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंप्यूटर भाषाओं के मानकीकरण का कार्य करने वाली संस्था Unicode Consortium ने तोलोंग सिकि के लिए विकसित “Kelly Tolong” फॉन्ट को यूनिकोड प्रणाली में शामिल कर लिया है।

इस फॉन्ट का निर्माण कंप्यूटर विज्ञानी और पत्रकार Kislaya ने किया है। इस उपलब्धि के साथ ही कुड़ुख भाषा अब डिजिटल दुनिया में पूरी तरह स्थापित हो गई है और वैश्विक भाषा मानचित्र पर उसकी उपस्थिति और मजबूत हो गई है।

आदिवासी भाषा के लिए ऐतिहासिक क्षण

कुड़ुख भाषा भारत के झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित कई क्षेत्रों में रहने वाले उरांव (ओरांव) आदिवासी समुदाय की प्रमुख भाषा है। इसके अलावा नेपाल और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी इस भाषा के बोलने वाले लोग मौजूद हैं।

लंबे समय तक यह भाषा मुख्य रूप से मौखिक परंपरा के माध्यम से ही जीवित रही। बाद में इसे लिखने के लिए Tolong Siki लिपि का विकास किया गया, जिससे कुड़ुख भाषा को एक स्वतंत्र और सांस्कृतिक रूप से पहचान देने वाला लेखन माध्यम मिला।

इस लिपि के विकास का श्रेय Dr. Narayan Oraon को जाता है। पेशे से चिकित्सक डॉ. नारायण उरांव झारखंड के जमशेदपुर में सरकारी डॉक्टर के रूप में कार्यरत हैं और मूलतः गुमला जिले के सिसई प्रखंड के सैन्दा गांव के निवासी हैं। उन्होंने कुड़ुख भाषा को एक स्वतंत्र लिपि देने की दिशा में अपनी ऐतिहासिक यात्रा वर्ष 1995 में शुरू की थी। वर्षों के अध्ययन, शोध और प्रयोग के बाद उन्होंने तोलोंग सिकि लिपि का विकास किया, जिसने कुड़ुख भाषा को एक नई पहचान प्रदान की।

यूनिकोड से खुला डिजिटल दुनिया का द्वार

हालांकि लिपि के विकास के बावजूद डिजिटल दुनिया में इसकी उपस्थिति सीमित थी, क्योंकि कंप्यूटर और मोबाइल उपकरणों पर किसी भी भाषा को लिखने-पढ़ने के लिए उसका यूनिकोड मानकीकरण आवश्यक होता है।

यूनिकोड वह वैश्विक मानक है जो दुनिया की हजारों भाषाओं और लिपियों को कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट पर एक समान तरीके से प्रदर्शित करने की सुविधा देता है।

अब Kelly Tolong फॉन्ट के माध्यम से तोलोंग सिकि लिपि में लिखे गए शब्द और वाक्य दुनिया के किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म—जैसे कंप्यूटर, मोबाइल फोन, वेबसाइट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्रकाशनों—में सही रूप में दिखाई दे सकेंगे।

इससे कुड़ुख भाषा में डिजिटल दस्तावेज, वेबसाइट, शिक्षण सामग्री, ई-बुक और सोशल मीडिया सामग्री तैयार करना आसान हो जाएगा।

‘Kelly Tolong’ फॉन्ट का विकास

Kelly Tolong फॉन्ट का निर्माण कंप्यूटर विज्ञानी व पत्रकार किसलय द्वारा किया गया है। किसी भी लिपि को यूनिकोड प्रणाली के अनुरूप फॉन्ट में बदलना एक जटिल तकनीकी प्रक्रिया होती है।

इसमें प्रत्येक अक्षर या ग्लिफ़ (glyph) को सावधानीपूर्वक डिज़ाइन करना पड़ता है और उसे यूनिकोड के निर्धारित कोड पॉइंट से जोड़ा जाता है, ताकि कंप्यूटर सिस्टम उसे सही ढंग से पहचान और प्रदर्शित कर सके।

इस तकनीकी कार्य के माध्यम से अब तोलोंग सिकि लिपि आधुनिक सॉफ्टवेयर, वेबसाइटों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सहज रूप से उपयोग की जा सकेगी।

तकनीक और सांस्कृतिक पहचान

भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की संस्कृति, इतिहास और पहचान का आधार भी होती है। आदिवासी समुदायों के लिए यह और भी अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाषा उनके पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का प्रमुख साधन है।

तोलोंग सिकि के डिजिटल रूप में आने से अब कुड़ुख भाषा में स्कूलों के लिए शिक्षण सामग्री, ऑनलाइन पुस्तकें, शोध सामग्री और सांस्कृतिक दस्तावेज तैयार करना आसान होगा।

यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा और लिपि से जुड़े रहने का अवसर भी प्रदान करेगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में नई संभावनाएँ

आज जब कंप्यूटर तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है और Artificial Intelligence का विस्तार हो रहा है, तब डिजिटल रूप में उपलब्ध भाषाएँ ही भविष्य की तकनीकों में शामिल हो पाती हैं।

तोलोंग सिकि लिपि के डिजिटल समर्थन से भविष्य में कुड़ुख भाषा को भी मशीन अनुवाद, वॉयस रिकग्निशन, भाषा विश्लेषण और अन्य एआई आधारित प्रणालियों में शामिल करने की संभावनाएँ बढ़ गई हैं।

इससे न केवल भाषा का संरक्षण होगा बल्कि यह वैश्विक तकनीकी मंचों पर भी अपनी जगह बना सकेगी।

वैश्विक भाषा मानचित्र पर कुड़ुख

Kelly Tolong फॉन्ट का यूनिकोड में शामिल होना केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और भाषाई दृष्टि से भी एक बड़ा मील का पत्थर है।

डॉ. नारायण उरांव द्वारा 1995 में शुरू की गई तोलोंग सिकि लिपि की यात्रा अब डिजिटल युग में एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। वहीं आधुनिक कंप्यूटर तकनीक और फॉन्ट डिज़ाइन के माध्यम से इस लिपि को वैश्विक डिजिटल मंच तक पहुँचाने का कार्य किसलय द्वारा तैयार किए गए Kelly Tolong फॉन्ट ने संभव बनाया है।

इस कदम के साथ कुड़ुख भाषा अब डिजिटल युग में पूरी तरह प्रवेश कर चुकी है। अब यह भाषा केवल स्थानीय समुदाय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इंटरनेट और आधुनिक तकनीक के माध्यम से विश्व स्तर पर पढ़ी-लिखी और साझा की जा सकेगी।

यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि जब तकनीक, शोध और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता एक साथ मिलते हैं, तो किसी भी भाषा और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई जा सकती है।

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